आयुर्वेद में प्रयुक्त होने वाले मुख्य शब्दों (दोष, धातु, गुण) के अर्थ और परिभाषाएं
अग्नि और जल तत्वों से बना शारीरिक दोष जो चयापचय को नियंत्रित करता है।
पित्त दोष शरीर की गर्मी, पाचन, और हार्मोनल संतुलन को नियंत्रित करता है। इसके बढ़ने से शरीर में अधिक गर्मी, गुस्सा, एसिडिटी और त्वचा पर दाने या मुहांसे हो सकते हैं।